अख़बार (फ़ेरी ) वाले का विश्लेषण

  आज प्रात: घर की सफाई के क्रम में श्रीमतीजी ने पेपर वाले को बुलाया। मैंने भी सोचा चलो इससे कुछ देश और सरकार के बारे में बात करते है। वो शख़्स जो रोज़ पुराने अख़बार इकठ्ठा करने के लिए घर से सुबह-सुबह निकल जाता है,उसके विचार सुनकर मै हैरान था। आज देश में जो कुछ भी… Continue reading अख़बार (फ़ेरी ) वाले का विश्लेषण

नंगे पाँव

आज बहुत दिनों बाद, नंगे पाँव चलके देखा, ऐसा लगा जैसे तलवों ने, धरती को चूम लिया , भीगी मिट्टी पर चलने का  एहसास ,कैसे बताऊ तुझे , ऐसा लगता है , जैसे  बंजर में बारिश का पानी भरा, चुभते कंकड़ ने एहसास कराया , कितने दूर हो गये धरती माँ से, जिसने हमे जीना… Continue reading नंगे पाँव

अब बड़ा हो गया हूँ मैं 

जब भी देखता हूँ अपनी बेटीयों को, लगता है अब बड़ा हो गया हूँ मैं , थोड़ा ज्यादा सोचने लगा हूँ आजकल , पहले से ज्यादा डरने लगा हूँ मैं , कही कुछ कमी ना रह जाये , कोशिश करता रहता हूँ, अब अकेले रहने का मन होता नहीं , ज़्यादा खुश रहता हूँ जब मेरी… Continue reading अब बड़ा हो गया हूँ मैं 

सेल्फ़ी – एक नया जानलेवा क्रेज़ Selfie : A New Dangerous Craze

परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी आजकल टीवी पर सेल्फ़ी से  होने वाले मौतों का आकड़ा बता रहे है। कभी सोचा आपने मंत्री जी को ऐसा क्यों करना पड़ रहा है। भारत में सड़क दुर्घटना में होने वाले मौतों के बाद सर्वाधिक मौत यदि किसी बुरी आदत हो रही है, तो वो है सेल्फ़ी। “सेल्फ़ी” जैसा की… Continue reading सेल्फ़ी – एक नया जानलेवा क्रेज़ Selfie : A New Dangerous Craze

अभी तो चलने की शुरुवात है

अभी तो चलने की शुरुवात है,  थकना मना है दोस्त, चलना तो छोड़ नहीं सकते, और तेज़ चलने की  ज़रूरत है , और दूर बहुत जाना है दोस्त  फ़ासले भी तय कर लेंगे , दोस्तों को साथ लेकर , बिना रिश्तों से दूर हुए ऐ दोस्त  भीड़ में तो सब चलते है , अकेले -अकेले तो सिर्फ़ … Continue reading अभी तो चलने की शुरुवात है

अमरनाथ -हमला

 अमरनाथ दर्शनार्थियों  पर ये हमला सिर्फ़ इंसानियत पर हमला ही नहीं अपितु ये जबरदस्त चुनौती है हमारी सुरक्षा व्यवस्था पर। कैसे मान सकते है इतनी सुरक्षा के बिच इतना बड़ा आतकवादी हमला हो जाता है? साल के इस बहुप्रतीक्षित यात्रा पर लाखों खर्च किये जाते है सुरक्षा व्यवस्था पर। सब जानते है यात्रा कितना संवेदनशील है, सारा… Continue reading अमरनाथ -हमला

हे भोले …

हे भोले कर दो कुछ ऐसा इस सावन में, मिट जाये लोगों के , कष्ट,ना रहे भूखा-प्यासा कोई , इस धरा पर , ना हो मौत किसी का , भूख से , जो उगाता है , वही भूखा है , और जो खाता है , वो तय करता उनकी नियति, वाह क्या विडंबना है, हे भोले क्यों… Continue reading हे भोले …